परिचय (Introduction):
Makar Sankranti 2025 भारत के प्रमुख उत्सवों में से एक है। यह त्योहार हर साल सूर्य के मकर राशि में पड़ने पर मनाया जाता है। Makar Sankranti न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मौसम परिवर्तन और फसल कटाई के उत्सव का प्रतीक भी है। इस लेख में, हम Makar Sankranti 2025 के इतिहास, परंपराओं, धार्मिक महत्व और आधुनिक उत्सव के तरीकों को विस्तार से जानेंगे।
Makar Sankranti का महत्व (Significance of Makar Sankranti):
1. धार्मिक महत्व (Religious significance):
Makar Sankranti को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने आते हैं। गंगा स्नान, दान-पुण्य और सूर्य उपासना इस दिन की प्रमुख गतिविधियाँ हैं।
2. मौसम परिवर्तन (Weather changes):
Makar Sankranti के साथ ही शीत ऋतु का अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। यह समय फसलों की कटाई और नए अनाज के स्वागत का होता है।
3. फसल उत्सव (Harvest Festival):
भारत के विभिन्न भागों में Makar Sankranti को फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पंजाब में इसे “Lohri,” तमिलनाडु में “Pongal,” और असम में “Bhogali Bihu” के नाम से जाना जाता है।
Makar Sankranti 2025 की तिथि और समय (Makar Sankranti 2025 date and time):
Makar Sankranti 2025 इस बार 15 जनवरी को मनाई जाएगी। पवित्र स्नान और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:
सूर्योदय: 07:15 AM
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: 03:03 AM (14 जनवरी की रात)।
पुण्य काल: 07:15 AM से 12:30 PM तक।
Makar Sankranti की परंपराएँ (Traditions of Makar Sankranti):
1. गंगा स्नान (Bathing in the Ganges):
Makar Sankranti के दिन गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पवित्र स्नान से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2. दान-पुण्य (Charity):
इस दिन दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। तिल, गुड़, कपड़े और अन्न का दान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
3. तिल और गुड़ के व्यंजन (Sesame and Jaggery Recipes):
Makar Sankranti पर तिल और गुड़ से बने लड्डू, चक्की और अन्य मिठाइयाँ खाई और बांटी जाती हैं। यह परंपरा मिठास और आपसी प्रेम का प्रतीक है।
4. पतंगबाजी (Kite flying):
गुजरात और राजस्थान में Makar Sankranti पर पतंगबाजी एक प्रमुख गतिविधि है। क्षितिज पर तैरते रंग-बिरंगे पतंगों का दृश्य वाकई शानदार है।
भारत के विभिन्न राज्यों में Makar Sankranti (Makar Sankranti in different states of India):
1. उत्तर प्रदेश और बिहार (Uttar Pradesh and Bihar):
यहाँ इसे “Khichdi” के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन लोग गंगा स्नान करते हैं और खिचड़ी, तिल-गुड़ का दान करते हैं।
2. पंजाब (Punjab):
पंजाब में Makar Sankranti से एक दिन पहले “Lohri” मनाई जाती है।
इस दौरान लोग आग जलाकर पारंपरिक नृत्य और गीतों का आनंद लेते हैं।
3. तमिलनाडु (Tamil Nadu):
इसे “Pongal” के नाम से जाना जाता है।
लोग सूर्य देवता को पोंगल नामक विशेष व्यंजन अर्पित करते हैं।
4. असम (Assam):
असम में इसे “Bhogali Bihu” के रूप में मनाया जाता है।
पारंपरिक भोज, नृत्य और संगीत का आयोजन किया जाता है।
5. महाराष्ट्र (Maharashtra):
यहाँ महिलाएँ “Haldi-Kumkum” समारोह का आयोजन करती हैं।
“Tilgul ghya, God God Bola” बोलते हुए मिठाइयाँ वितरित किया जाता है।
Makar Sankranti 2025 के आधुनिक उत्सव (Modern Celebrations of Makar Sankranti 2025):
आज के दौर में Makar Sankranti के पारंपरिक स्वरूप में थोड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। लोग अब सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए शुभकामनाएँ साझा करते हैं। पतंगबाजी और पारंपरिक भोज के साथ-साथ अब लोग इस त्योहार को पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
Makar Sankranti पर पूजा विधि (Method of worship on Makar Sankranti):
1. प्रातःकाल उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
2. सूर्य को अर्घ्य दें और तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3. तिल और गुड़ का दान करें।
4. परिवार के साथ तिल-गुड़ के लड्डू और खिचड़ी का भोजन करें।
5. जरूरतमंदों को कपड़े और अन्न का दान करें।
Makar Sankranti 2025 के लिए सुझाव (Tips for Makar Sankranti 2025):
1. जल संरक्षण: गंगा स्नान के दौरान पानी की बर्बादी न करें।
2. पर्यावरण-अनुकूल पतंग: नायलॉन की जगह कागज की पतंगों का उपयोग करें।
3. प्लास्टिक का उपयोग न करें: दान सामग्री को प्लास्टिक बैग में न बांधें।
निष्कर्ष (Conclusion):
Makar Sankranti 2025 न केवल भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि यह लोगों के बीच सामूहिकता और प्रेम को बढ़ावा देने का अवसर भी है। इस पावन त्योहार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाएं और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।