परिचय (Introduction):
Rath Yatra Puri 2025 तारीखें और रीति-रिवाज भारत के सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है, जो भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सम्मान में मनाया जाता है। यह यात्रा ओडिशा के पुरी शहर में आयोजित की जाती है और इसे पूरे विश्व में एक भव्य उत्सव के रूप में जाना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन में भाग लेने के लिए पुरी पहुंचते हैं। इस लेख में, हम Rath Yatra Puri 2025 तारीखें और रीति-रिवाज के बारे में विस्तार से जानेंगे।
रथ यात्रा पुरी 2025 की तारीखें (Rath Yatra Puri 2025 Dates):
Rath Yatra Puri 2025 इस वर्ष 7 जुलाई 2025 (सोमवार) को मनाई जाएगी। यह तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को आती है। यह उत्सव नौ दिनों तक चलता है और इसके विभिन्न चरण होते हैं।
मुख्य तिथियां (Key dates):
Rath Yatra Puri 2025 Start Date: 7 जुलाई 2025
Bahuda Yatra (Return Journey): 15 जुलाई 2025
Suna Besha: 16 जुलाई 2025
Niladri Bijaya (Completion Ceremony): 17 जुलाई 2025
रथ यात्रा का इतिहास (History of Rath Yatra Puri):
पुरी की Rath Yatra का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। इसे भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए सबसे पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है और इसे महाभारत और पुराणों में भी उल्लेखित किया गया है।
भगवान जगन्नाथ का मंदिर: पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर भारत के चार धामों में से एक है।
पहली Rath Yatra: ऐसा माना जाता है कि पहली रथ यात्रा 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव द्वारा शुरू की गई थी।
शास्त्रों में उल्लेख: स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और पद्म पुराण में इस यात्रा का वर्णन मिलता है।
रथ यात्रा के रीति-रिवाज (Rituals of Rath Yatra Puri 2025):
1. रथ निर्माण (Chariot Construction):
रथ यात्रा के लिए तीन विशाल रथ बनाए जाते हैं:
Jagannath Rath (Nandighosa) – 45 फीट ऊंचा, 16 पहियों वाला।
Balabhadra Rath (Taladhwaja) – 44 फीट ऊंचा, 14 पहियों वाला।
Subhadra Rath (Darpadalana) – 43 फीट ऊंचा, 12 पहियों वाला।
रथों का निर्माण आषाढ़ महीने के अक्षय तृतीया से शुरू होता है। इसमें 1,000 से अधिक कारीगर और बढ़ई भाग लेते हैं।
2. स्नान पूर्णिमा (Snana Purnima):
रथ यात्रा से 15 दिन पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को मंदिर परिसर में एक विशेष स्नान मंडप में लाया जाता है, जहां उन्हें 108 कलशों के जल से स्नान कराया जाता है।
3. नेत्र उत्सव (Netra Utsav):
स्नान के बाद, भगवान को 15 दिनों के लिए एकांतवास में रखा जाता है जिसे ‘Anasara’ कहा जाता है। इसके बाद Netra Utsav के दिन भगवान को एक नया स्वरूप प्रदान किया जाता है।
4. रथ यात्रा (Rath Yatra Festival):
7 जुलाई 2025 को सुबह मंगला आरती के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होते हैं। गजपति महाराज पारंपरिक Chera Pahara (रथों की सफाई) करते हैं। फिर लाखों भक्त रथों को खींचते हैं और यह यात्रा गुंडिचा मंदिर तक जाती है।
5. गुंडिचा मंदिर (Gundicha Temple Stay):
भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन सात दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विश्राम करते हैं। इसे भगवान की मौसी का घर माना जाता है।
6. बहुड़ा यात्रा (Bahuda Yatra – Return Journey):
15 जुलाई 2025 को भगवान जगन्नाथ अपने मूल स्थान पर लौटते हैं।
7. सुना बेशा (Suna Besha Ceremony):
16 जुलाई 2025 को भगवान जगन्नाथ को स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है। इस दिन भगवान 208 किलो सोने के आभूषण धारण करते हैं।
8. नीलाद्री विजय (Niladri Bijaya):
17 जुलाई 2025 को भगवान को मंदिर में वापस लाया जाता है, और इस तरह रथ यात्रा का समापन होता है।
रथ यात्रा पुरी 2025 का महत्व (Significance of Rath Yatra Puri 2025):
1. आध्यात्मिक महत्व: भगवान जगन्नाथ को श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। यह यात्रा भक्तों के लिए मोक्ष प्राप्ति का अवसर है।
2. सांस्कृतिक धरोहर: यह उत्सव ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान है।
3. पर्यटन और अर्थव्यवस्था: हर साल लाखों पर्यटक पुरी आते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
रथ यात्रा पुरी 2025 यात्रा गाइड (Travel Guide for Rath Yatra Puri 2025):
कैसे पहुंचे? (How to reach?):
निकटतम हवाई अड्डा: भुवनेश्वर एयरपोर्ट (60 किमी दूर)।
रेलवे स्टेशन: पुरी रेलवे स्टेशन।
सड़क मार्ग: पुरी राष्ट्रीय राजमार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
रहने की व्यवस्था (Living arrangements):
पुरी में होटल, धर्मशाला और गेस्ट हाउस की बुकिंग पहले से करना आवश्यक है।
भोजन और प्रसाद (Food and offerings):
पुरी में महाप्रसाद का स्वाद लेना न भूलें।
निष्कर्ष (Conclusion):
Rath Yatra Puri 2025 एक दिव्य और भव्य आयोजन है। यदि आप इस उत्सव का अनुभव करना चाहते हैं, तो अभी से अपनी योजना बना लें और इस आध्यात्मिक यात्रा का आनंद लें।