Thrissur Pooram 2025: के दौरान घूमने लायक प्रमुख मंदिर इतिहास, आयोजन और यात्रा गाइड

 परिचय (Introduction):

Thrissur Pooram 2025 केरल का सबसे भव्य और प्रतिष्ठित त्योहार है, जो हर साल मेदम मलयालम कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। 2025 में यह अप्रैल के अंत में आयोजित होगा। यह उत्सव मुख्य रूप से वडक्कुन्नाथन मंदिर के आसपास 10 मंदिरों के संगठन (चेरू) के बीच प्रतिस्पर्धा और सहयोग का प्रतीक है।

2025 के लिए नए आयोजन और बदलाव (New events and changes for 2025):

ईको-फ्रेंडली पूरम: प्लास्टिक-मुक्त प्रक्रिया और सोलर-पावर्ड लाइटिंग।  

वर्चुअल पार्टिसिपेशन: 4K लाइव स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूर।

सुरक्षा अपग्रेड: AI-Based क्राउड मैनेजमेंट और इमरजेंसी मेडिकल कैंप।

Thrissur Pooram 2025 के दौरान घूमने वाले प्रमुख मंदिर (Major temples to visit during Thrissur Pooram 2025):

1. वडक्कुन्नाथन मंदिर (Vadakkunnathan Temple):

Thrissur Pooram 2025

इतिहास: 1,000 साल पुराना केरल के सबसे बड़े शिव मंदिरों में से एक।  

Pooram में भूमिका: मुख्य आयोजन स्थल, जहां “मदथिल वरवु” (हाथियों की परेड) और “कुदामाट्टम” (छत्रों की प्रतियोगिता) होती है।  

2025 अपडेट: मंदिर प्रांगण में नई बैठने की व्यवस्था और व्हीलचेयर एक्सेस।

समय: सुबह 3:30 बजे से रात 10:30 बजे तक (Pooram दिवस पर 24 घंटे खुला)।

2. परमेक्कावु भगवती मंदिर (Paramekkavu Bhagavathy Temple):

Thrissur Pooram 2025

महत्व: पूरम की दूसरी मुख्य टीम, जो वडक्कुन्नाथन के साथ प्रतिस्पर्धा करती है।  

विशेष आयोजन: 15 हाथियों की शोभायात्रा और “एलेंजीथारम” (सोने की पोशाक)।  

नया 2025 में: भक्तों के लिए ऑनलाइन प्रसाद बुकिंग सुविधा।

3. तिरुवम्बादी श्री कृष्ण मंदिर (Thiruvambadi Sri Krishna Temple):

Thrissur Pooram 2025

क्यों जाएँ? यहां के “कृष्ण पूरम” की झांकियां और 30 हाथियों की रैली प्रसिद्ध है।

ट्रैवल टिप: मंदिर के पास “पूरम फूड फेस्टिवल” में केरल के पारंपरिक व्यंजन चखें।

4. अय्यंथोल मंदिर (Ayyanthole Temple):

विशेषता: पूरम के दौरान यहां “पंचवाद्यम” (पारंपरिक वाद्य संगीत) का आयोजन होता है।

समय: सुबह 5 बजे से दोपहर 1 बजे तक।

Thrissur Pooram 2025 के लिए यात्रा गाइड और टिप्स (Travel Guide and Tips for Thrissur Pooram 2025):

कैसे पहुंचे? (How to reach?):

Thrissur Pooram 2025

नेरेस्ट एयरपोर्ट: कोचीन इंटरनेशनल (85 KM)।  

ट्रेन: Thrissur Railway Station (1.5 KM शहर से)।

सड़क मार्ग: केरल SRTC की AC बसें कोचीन, बैंगलोर और चेन्नई से उपलब्ध।

कहाँ ठहरें? (Where to stay?):

लक्ज़री: लेमर ट्री होटल, त्रिसूर (मंदिर से 2 KM)।  

बजट: KTDC होटल (₹1500/रात)।

होमस्टे:”Pooram Special Packages” में स्थानीय परिवारों के साथ रहने का विकल्प।

सुरक्षा सलाह (Safety Advice):

भीड़ से बचें: मुख्य आयोजन सुबह 6-8 बजे या रात 8-10 बजे देखें।

महिला यात्री: ड्रेस कोड (साड़ी/सलवार कुर्ता) का पालन करें और ग्रुप में रहें।

Pooram 2025 के दौरान मंदिरों में विशेष अनुष्ठान (Special rituals in temples during Pooram 2025):

इलंजिथारम (सोने की पोशाक) (Ilanjithara (Gold Dress):

Thrissur Pooram 2025

समय: पूरम की सुबह 7 बजे।  

क्या है? हाथियों को 80 किलो सोने के गहनों से सजाया जाता है।

वेदिक्केट्टु (ड्रम संगीत) (Vedikkettu (drum music):

महत्व: 250 कलाकारों द्वारा 4 घंटे तक चलने वाला पंचवाद्यम।

स्थान: वडक्कुन्नाथन मंदिर का पूर्वी गेट।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):

क्या Pooram 2025 में नॉन-हिंदू प्रवेश कर सकते हैं?  

हां, सभी धर्मों के लोगों का स्वागत है, लेकिन मंदिरों के अंदर ड्रेस कोड फॉलो करना अनिवार्य है।  

पूरम के दौरान फोटोग्राफी की अनुमति है?  

हां, लेकिन ड्रोन और प्रोफेशनल कैमरों के लिए अनुमति चाहिए।  

बच्चों के लिए सुविधाएं?  

मंदिर परिसर में बेबी केयर रूम और फर्स्ट एड केंद्र उपलब्ध हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

बुकिंग: होटल और ट्रैवल पास 6 महीने पहले बुक करें।  

स्थानीय संस्कृति: पारंपरिक वस्त्र पहनें और “पायसम” प्रसाद जरूर चखें।  

ध्यान रखें: Pooram केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि केरल की आत्मा है!

अगर आप इस अद्भुत उत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाएं। होटल और ट्रैवल पास कम से कम 6 महीने पहले बुक करें, क्योंकि उत्सव के दौरान त्रिसूर में भारी भीड़ होती है और अधिकांश होटल पहले ही फुल हो जाते हैं। ठहरने के लिए होमस्टे का विकल्प भी चुन सकते हैं, जिससे आपको स्थानीय जीवनशैली को करीब से समझने का मौका मिलेगा।

Thrissur Pooram का अनुभव तभी पूर्ण होता है जब आप केरल की स्थानीय संस्कृति में खुद को शामिल करें। कोशिश करें कि पारंपरिक केरलियन वेशभूषा जैसे कि पुरुषों के लिए “मुंडु” और महिलाओं के लिए “कसावु साड़ी” पहनें। इससे न केवल आपको इस त्योहार का सही अनुभव मिलेगा, बल्कि आप स्थानीय लोगों के साथ एक गहरी सांस्कृतिक जुड़ाव भी महसूस करेंगे। साथ ही, मंदिर में “पायसम” प्रसाद का स्वाद चखना न भूलें, क्योंकि यह इस उत्सव की मिठास को और भी खास बना देता है।

हालांकि, यह उत्सव देखने में जितना भव्य और रंगीन लगता है, उतना ही विशाल और भीड़-भाड़ वाला भी होता है। इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सुबह या देर रात के समय मुख्य आयोजन स्थलों पर जाएं ताकि भीड़ से बच सकें। अगर आप महिला यात्री हैं, तो बेहतर होगा कि ग्रुप में यात्रा करें और मंदिर परिसर में निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करें।

Thrissur Pooram केवल हाथियों की शोभायात्रा, आतिशबाजी और संगीत का आयोजन नहीं है, बल्कि यह केरल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यह उत्सव यह संदेश देता है कि कैसे भक्ति, सौहार्द और सांस्कृतिक विविधता एक साथ मिलकर एक भव्य आयोजन को जन्म दे सकते हैं। यह न केवल स्थानीय लोगों के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे भारत और दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होता है।

तो इस बार Thrissur Pooram 2025 में शामिल होकर इस अद्भुत पर्व का हिस्सा बनें और केरल की समृद्ध परंपराओं को करीब से महसूस करें!

  

  

  

  

  

  

  

  


  


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