परिचय (Introduction):
Varuthini Ekadashi 2025 हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिसे भक्तगण भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के साथ मनाते हैं। यह पावन दिन हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस वर्ष, यह एकादशी 16 अप्रैल 2025 (बुधवार) को मनाई जाएगी। आइए इस लेख में वरूथिनी एकादशी की महिमा, व्रत विधि और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं पर विस्तार से चर्चा करें।
Varuthini Ekadashi 2025 का महत्व (Importance of Varuthini Ekadashi):
Varuthini Ekadashi का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत उच्च है। इसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और पापों के प्रायश्चित के लिए उत्तम दिन माना गया है।
1. मोक्ष प्राप्ति का मार्ग: वरूथिनी एकादशी पर व्रत रखने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2. पापों का नाश: यह एकादशी व्यक्ति के जीवन के सभी पापों को समाप्त करती है।
3. आध्यात्मिक शुद्धि: इस व्रत के पालन से आत्मा की शुद्धि होती है और मनुष्य अपने जीवन में सकारात्मकता प्राप्त करता है।
4. धन और सौभाग्य: इस दिन व्रत और दान से भगवान विष्णु की कृपा से धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
Varuthini Ekadashi 2025 की पौराणिक कथा (Mythology of Varuthini Ekadashi):
पुराणों के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को वरूथिनी एकादशी का महत्व बताया था। कथा के अनुसार, नर्मदा नदी के किनारे राजा मान्धाता तपस्या में लीन थे। एक दिन, एक जंगली भालू ने उनके पैर पर हमला कर दिया। राजा ने भगवान विष्णु की आराधना की, जिसके परिणामस्वरूप भगवान ने उनकी रक्षा की और उन्हें श्राप मुक्त किया। इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि Varuthini Ekadashi का व्रत रखने से सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
वरूथिनी एकादशी व्रत विधि (Varuthini Ekadashi fasting method):
वरूथिनी एकादशी व्रत को पूर्ण विधि-विधान के साथ किया जाना चाहिए।
व्रत से एक दिन पहले (दशमी तिथि) (One day before the fast (Dashami Tithi):
1. सात्विक भोजन ग्रहण करें।
2. तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज और मांसाहार) का त्याग करें।
3. शुद्ध और सकारात्मक मन के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करें।
व्रत के दिन (Varuthini Ekadashi):
1. प्रातःकाल स्नान: सूर्योदय से पहले स्नान करें और पवित्र वस्त्र धारण करें।
2. भगवान विष्णु की पूजा: तुलसी के पत्ते, चंदन, फूल, और दीपक के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें।
3. मंत्र जप: “१िन्नों देव्य ममन्तान्नो बिष्णु” मंत्र का जप करें।
4. उपवास: दिनभर निराहार या फलाहार करें।
5. व्रत कथा सुनना: व्रत कथा का श्रवण करें। यह व्रत का अभिन्न अंग है।
पारण (द्वादशी तिथि) (Parana (Twelfth Day):
अगले दिन व्रत का पारण सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण के लिए सात्विक भोजन का ही सेवन करें।
वरूथिनी एकादशी के लाभ (Benefits of Varuthini Ekadashi):
1. आध्यात्मिक लाभ: व्रत के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करने से मन को शांति मिलती है।
2. पारिवारिक सुख-शांति: इस व्रत के पालन से परिवार में सुख और शांति बनी रहती है।
3. स्वास्थ्य लाभ: उपवास रखने से शरीर में विषाक्त पदार्थों का नाश होता है।
4. आध्यात्मिक उन्नति: व्यक्ति के आध्यात्मिक स्तर में वृद्धि होती है।
2025 में वरूथिनी एकादशी का समय (Varuthini Ekadashi Timings in 2025):
एकादशी तिथि प्रारंभ: 15 अप्रैल 2025 को रात 9:10 बजे से।
एकादशी तिथि समाप्त: 16 अप्रैल 2025 को रात 11:45 बजे तक।
पारण का समय: 17 अप्रैल 2025 को प्रातः 6:10 बजे से 8:45 बजे तक।
वरूथिनी एकादशी पर दान का महत्व (Importance of donation on Varuthini Ekadashi):
इस दिन दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
1. अन्न दान: भूखों को भोजन करवाना श्रेष्ठ माना गया है।
2. वस्त्र दान: गरीब और जरूरतमंदों को वस्त्र दान करें।
3. धन दान: धार्मिक कार्यों में योगदान दें।
4. गो दान: गो सेवा का विशेष महत्व है।
निष्कर्ष (Conclusion):
Varuthini Ekadashi 2025 व्रत रखने का एक अद्भुत अवसर है जिससे भक्त न केवल पापों से मुक्ति पा सकते हैं बल्कि भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त कर सकते हैं। यह दिन आत्मा की शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस पावन एकादशी पर विधिपूर्वक व्रत का पालन करें और भगवान विष्णु की आराधना से अपने जीवन को सुखमय बनाएं।